हो समाज की आत्मा और अस्मिता का महापर्व मागे परब

— 8 फरवरी को सेक्टर-8ए सरना स्थल में होगा भव्य आयोजन

बोकारो। हो समाज की संस्कृति, परंपरा और सामूहिक चेतना का प्रतीक मागे परब आगामी रविवार 8 फरवरी को सेक्टर-8ए स्थित सरना स्थल में बोकारो हो समाज समिति के तत्वावधान में श्रद्धा, गर्व और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया जाएगा। पर्व को ऐतिहासिक और यादगार बनाने को लेकर गुरुवार को आयोजन समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता समिति अध्यक्ष मुनेश बारी ने की। बैठक में पर्व को सफल, सुव्यवस्थित और हर्षोल्लासपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

इस दौरान अध्यक्ष मुनेश बारी ने कहा कि मागे परब केवल एक पर्व नहीं, बल्कि हो समाज की जड़ों, भाषा और पूर्वजों के सपनों से जुड़ने का जीवंत माध्यम है। यह पर्व हमें प्रकृति, सिंगबोंगा और समाज के साथ सामंजस्य में जीवन जीने की सीख देता है। उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक दौर में जब सांस्कृतिक पहचान पर संकट है, तब मागे परब हमें अपनी विरासत को संजोने और आत्मसम्मान के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। अध्यक्ष ने विशेष रूप से समाज के युवाओं से आह्वान करते हुए कहा कि युवाओं की सक्रिय सहभागिता ही हमारी संस्कृति का भविष्य है। उन्होंने कहा कि आइए, मागे परब को केवल उत्सव नहीं, बल्कि पहचान बचाने और विरासत सहेजने का आंदोलन बनाएं।

समिति के संरक्षक ललित पूर्ति ने मागे परब के दार्शनिक और आध्यात्मिक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ईश्वर (षिञवोङ्गा) की इच्छा से प्रथम माता-पिता लुकु- लुकमि की द्वैत शक्ति द्वारा सृष्टि के उद्देश्य को आगे बढ़ाने की भावना ही मागे परब का मूल सार है। आयोजन समिति ने सभी समाजबंधुओं से अपील की है कि वे कार्यक्रम में पारंपरिक वेशभूषा में उपस्थित होकर आयोजन की शोभा बढ़ाएं और अपनी सांस्कृतिक पहचान को सशक्त रूप से प्रस्तुत करें।

मौके पर समिति के सचिव अनु बिरुली, कोषाध्यक्ष सुखसेन देवगाम, उप कोषाध्यक्ष ब्रजमोहन तुबिद, संरक्षक ललित पूर्ति, संजय पूर्ति, निरंजन कुंकल, कृष्णा गगराई, तिरला चांपिया, दीपक मेलगांडी समेत कई सदस्य उपस्थित रहे। पर्व को सफल बनाने में कार्यकारिणी सदस्य दिकू, माणिक, बीरेंद्र, सीडीयू, बिशु, राजीव, कमल, जगत, सुनीता, लक्ष्मण, सिकन्दर, नाबानंदनेश्वर, रमेश, मिरन सहित कई अन्य सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं।

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